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Chapter 1 - Unnamed

बात उस समय की है जब मैं सिर्फ 16 साल की थी | और कक्षा 10 में पढ़ती थी उस दिन जब मैं स्कूल गई और मैने उसे पहली दफा देखा मैं नीचे ग्राउंड में थी और वह दूसरी मंजिल ,आखरी कमरा,आखिरी बेंच पहली नजर थी ,दूरियां थी पर दिल ने कहा बस इसे ही देखो वह दूर होते हुए भी दिल के करीब लग गया किसी ने बिना बोले ही मेरा दिल चुरा लिया न जाने क्यों लगा की कहानी यहीं से शुरू होनी है उस दिन के बाद ग्राउंड मेरा रोज का बहाना बन गया असेंबली के टाइम, लंच में ,छुट्टी के बाद, नजर अपने आप सेकंड फ्लोर की तरफ उठ जाती है और वह हमेशा वही आखिरी बेंच पर फिर एक दिन लगा कि वह मुझे मुझसे ज्यादा देखता है जितनी बार नज़रें टकराती है ,दिल धड़कते हैं और फिर हर पल एक अजीब सी बेचैनी रहती है धीरे-धीरे बहाने बढ़ने लगे कभी पानी पीने के लिए नीचे जाती तो कभी दोस्तों के बहाने उसके क्लास के पास से गुजरती बिना नाम जाने बिना बात किए एक अजीब सी जान पहचान हो गई थी |

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