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Ravi Ka Badla Hua Naseeb part 2

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Chapter 1 - Ravi Ka Badla Hua Naseeb part 2

रवि पूरी रात सोचता रहा। उसके पास शहर जाने के पैसे नहीं थे, लेकिन उसका सपना उससे भी बड़ा था।

सुबह होते ही उसने अपनी पुरानी साइकिल निकाली। शहर गाँव से लगभग 40 किलोमीटर दूर था।

रवि ने खुद से कहा,

"अगर किस्मत मेरा साथ नहीं दे रही, तो मैं खुद अपनी किस्मत बना लूँगा।"

वह साइकिल लेकर शहर की तरफ निकल पड़ा।

रास्ता आसान नहीं था। धूप तेज थी, पेट में भूख थी और पैर दर्द कर रहे थे। लेकिन रवि रुकना नहीं चाहता था।

करीब 3 घंटे बाद वह शहर पहुँच गया।

जब वह प्रतियोगिता के हॉल में पहुँचा तो गार्ड ने उसे रोका।

"तुम लेट हो गए हो। एंट्री बंद हो चुकी है।"

रवि का दिल टूट गया।

वह बाहर बैठ गया और सोचने लगा —

"क्या मेरा सपना यहीं खत्म हो जाएगा?"

तभी अंदर से एक सर बाहर आए। उन्होंने रवि को उदास बैठे देखा और पूछा,

"क्या हुआ?"

रवि ने अपनी पूरी कहानी बता दी।

सर कुछ देर चुप रहे… फिर बोले,

"अगर तुम्हारे अंदर सच में इतना जज़्बा है, तो मैं तुम्हें एक मौका देता हूँ।"

रवि की आँखों में फिर से उम्मीद चमक उठी…

लेकिन उसे नहीं पता था कि अंदर जो सवाल आने वाले हैं, वे उसकी ज़िंदगी बदलने वाले हैं…

रवि को एक अलग कमरे में बैठाया गया। वहाँ सिर्फ एक टेबल और कुर्सी थी।

कुछ देर बाद वही सर आए और बोले,

"यह एक स्पेशल टेस्ट है। अगर तुम पास हो गए तो तुम्हें छात्रवृत्ति मिल सकती है।"

रवि ने बिना सोचे तुरंत कहा,

"सर, मैं पूरी कोशिश करूँगा।"

टेस्ट शुरू हुआ। सवाल मुश्किल थे। कुछ सवाल ऐसे थे जो उसने कभी देखे भी नहीं थे।

लेकिन रवि ने हार नहीं मानी। जो आता था वह लिखता गया और जो नहीं आता था उसे समझने की कोशिश करता रहा।

दो घंटे बाद टेस्ट खत्म हुआ।

सर ने कॉपी ली और बोले,

"अब तुम्हें रिजल्ट के लिए इंतज़ार करना होगा।"

रवि बाहर बैठ गया। उसके दिल की धड़कन तेज थी।

उसे लग रहा था कि शायद उसने अच्छा नहीं किया।

करीब आधे घंटे बाद सर बाहर आए।

उन्होंने रवि को अंदर बुलाया।

रवि डरते-डरते अंदर गया।

सर मुस्कुराते हुए बोले,

"रवि, तुम्हारे सारे जवाब सही नहीं हैं… लेकिन तुम्हारी मेहनत और सोच अलग है।"

रवि चुप रहा।

फिर सर ने कहा,

"हम तुम्हें स्कॉलरशिप दे रहे हैं। अब तुम शहर के अच्छे कॉलेज में पढ़ सकते हो।"

रवि को अपनी बातों पर विश्वास ही नहीं हुआ।

उसकी आँखों में आँसू आ गए।

उसने धीरे से कहा,

"सर, मैं वादा करता हूँ कि मैं इस मौके को कभी बेकार नहीं जाने दूँगा।"

कुछ महीनों बाद रवि शहर के कॉलेज में पढ़ने लगा।

शुरू में उसे बहुत मुश्किल हुई। शहर की पढ़ाई गाँव से बहुत अलग थी।

कई बार उसे लगता था कि वह पीछे रह जाएगा।

लेकिन हर बार उसे वही दिन याद आता जब उसने 40 किलोमीटर साइकिल चलाकर अपना सपना बचाया था।

धीरे-धीरे उसकी मेहनत रंग लाने लगी।

वह कॉलेज के टॉप स्टूडेंट्स में शामिल हो गया।

कई साल बाद…

रवि एक बड़े ऑफिस में इंटरव्यू देने गया।

इंटरव्यू लेने वाले लोगों ने उससे पूछा,

"तुम्हारी सबसे बड़ी ताकत क्या है?"

रवि मुस्कुराया और बोला,

"मैं कभी हार नहीं मानता।"

कुछ दिनों बाद उसे नौकरी मिल गई।

जब वह अपने गाँव वापस गया तो वही लोग जो पहले उसका मज़ाक उड़ाते थे, आज उस पर गर्व कर रहे थे।

रवि ने अपने पुराने स्कूल में जाकर बच्चों से कहा —

"सपना छोटा हो या बड़ा, अगर मेहनत सच्ची हो तो कोई भी गरीब लड़का अपनी किस्मत बदल सकता है।"

और उसी दिन से गाँव के कई बच्चों ने बड़े सपने देखना शुरू कर दिया…

THE END ✨