रात के लगभग 11 बजे थे। गाँव के सरकारी स्कूल के पास से कोई भी गुजरना पसंद नहीं करता था। लोग कहते थे कि उस स्कूल में कुछ अजीब होता है।
राहुल, जो 9वीं कक्षा का छात्र था, इन बातों पर विश्वास नहीं करता था। एक दिन उसने अपने दोस्तों से कहा,
"मैं आज रात स्कूल जाकर देखूँगा कि सच में वहाँ भूत है या नहीं।"
दोस्तों ने उसे मना किया, लेकिन राहुल नहीं माना।
रात को वह चुपचाप घर से निकला और स्कूल की तरफ चल पड़ा। आसमान में बादल थे और हल्की हवा चल रही थी। जब वह स्कूल के गेट पर पहुँचा तो गेट आधा खुला हुआ था।
"अजीब है… गेट खुला कैसे है?" राहुल ने धीरे से कहा।
वह अंदर चला गया। स्कूल का मैदान बिल्कुल खाली था। चारों तरफ सन्नाटा था।
राहुल अपनी कक्षा की तरफ बढ़ा। जैसे ही वह क्लासरूम में पहुँचा, उसने देखा कि आखिरी बेंच पर कोई बैठा हुआ है।
राहुल का दिल तेज़ी से धड़कने लगा।
"क… कौन है वहाँ?" उसने डरते हुए पूछा।
कोई जवाब नहीं आया।
राहुल धीरे-धीरे उस बेंच के पास गया। अचानक खिड़की अपने-आप जोर से बंद हो गई।
धड़ाम!!!
राहुल डरकर पीछे हट गया।
अब उसने फिर से आखिरी बेंच की तरफ देखा… लेकिन इस बार वहाँ कोई नहीं था।
"यह कैसे हो सकता है… अभी तो कोई बैठा था!"
अचानक उसे पीछे से किसी के कदमों की आवाज़ सुनाई दी।
टक… टक… टक…
राहुल धीरे-धीरे पीछे मुड़ा।
लेकिन वहाँ भी कोई नहीं था।
अब उसका डर और बढ़ गया था।
तभी ब्लैकबोर्ड पर अपने-आप कुछ लिखना शुरू हो गया।
धीरे-धीरे चॉक से शब्द बनने लगे —
"यह मेरी सीट है…"
राहुल का गला सूख गया।
"क… कौन हो तुम?"
तभी क्लास के कोने से एक धीमी आवाज़ आई —
"मैं… यहाँ हमेशा बैठता हूँ…"
राहुल ने देखा कि अंधेरे में एक लड़के की परछाईं खड़ी थी। उसका चेहरा दिखाई नहीं दे रहा था।
वह लड़का धीरे-धीरे आगे आया।
अब राहुल ने देखा कि उसकी आँखें पूरी तरह काली थीं।
"तुम… मेरी सीट पर क्यों आए?" उस लड़के ने पूछा।
राहुल डर के मारे कुछ बोल ही नहीं पाया।
अचानक क्लास की सारी लाइट्स एक साथ जल उठीं और फिर बुझ गईं।
जब लाइट वापस आई…
तो राहुल आखिरी बेंच पर बैठा हुआ था — बिल्कुल उसी जगह जहाँ वह रहस्यमय लड़का बैठा था।
लेकिन अब राहुल उठ नहीं पा रहा था।
उसे लगा जैसे कोई उसे पकड़ कर बैठाए हुए है।
तभी ब्लैकबोर्ड पर फिर से शब्द लिखे गए —
"अब तुम यहाँ हमेशा बैठोगे…"
और उसी पल क्लासरूम का दरवाज़ा अपने-आप बंद हो गया।
अगले दिन सुबह जब स्कूल खुला, तो चपरासी ने देखा कि क्लास के अंदर आखिरी बेंच पर राहुल बेहोश पड़ा हुआ था।
जब राहुल को होश आया, तो उसने सिर्फ एक बात कही —
"वह अभी भी यहाँ है…"
लेकिन जब लोगों ने आखिरी बेंच की तरफ देखा…
तो वहाँ एक और परछाईं बैठी हुई थी।
और इस बार…
वह राहुल के बिल्कुल पीछे थी।
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