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Chapter 1 - chapter 2

डायरी के उन पीले पड़ चुके पन्नों को पलटते हुए आशुतोष के हाथ अचानक ठिठक गए। डायरी के बिल्कुल आखिरी हिस्से में एक लिफाफा चिपका हुआ था। धड़कते दिल के साथ उसने उसे खोला, तो अंदर से एक तस्वीर निकली।

तस्वीर देखते ही उसके होश उड़ गए। वह तस्वीर आशुतोष की ही थी, लेकिन उसमें वह आज से करीब 20-25 साल छोटा दिख रहा था—एक छोटा बच्चा, जो खिलखिला कर हंस रहा था। अजीब बात यह थी कि आशुतोष को याद ही नहीं कि उसने कभी ऐसी कोई फोटो खिंचवाई थी या वह कभी खुशबू के परिवार से मिला था। तस्वीर के पीछे नीली स्याही से लिखा था: "अधूरा कर्ज, जिसे इस जन्म में चुकाना ही होगा।"

वह रहस्यमयी घर

अगली सुबह, बेचैनी में आशुतोष दोबारा उसी पते पर पहुँचा जहाँ खुशबू का घर था। लेकिन वहां पहुँचते ही उसके पैरों तले जमीन खिसक गई।

जहाँ कल एक पुराना सुंदर घर खड़ा था, वहाँ आज सिर्फ एक खाली बंजर मैदान था।

आस-पास के लोगों से पूछने पर पता चला कि वहाँ पिछले 30 सालों से कोई घर था ही नहीं।

सिर्फ एक बूढ़ा नीम का पेड़ खड़ा था, जिसकी टहनी पर वही पुरानी चिट्ठी लटक रही थी, जिसे आशुतोष ने कल देखा था।

आशुतोष को अहसास हुआ कि खुशबू कोई साधारण लड़की नहीं, बल्कि उसके अतीत का कोई ऐसा हिस्सा है जो वक्त की परतों में कहीं खो गया था। खुशबू का वह 'राज' अब आशुतोष के वजूद को झकझोरने लगा था।

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