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Chapter 37 - अध्याय 37: पांचवां तत्व और टूटा हुआ आसमान (The Fifth Element and the Broken Sky)

पाताल लोक के केंद्र में सन्नाटा था। विक्रम का 'एबिस ट्राइडेंट' सोल ईटर की छाती के आर-पार हो चुका था। वह विशालकाय 'अर्ध-देवता' अब एक सूखे हुए कंकाल की तरह लटक रहा था।

​"खत्म हो गया?" मीरा ने नीचे से अपनी सांस रोककर पूछा।

​लेकिन विक्रम की भौंहें तनी हुई थीं। उसे जीत का अहसास नहीं हो रहा था। उसका 'डोंगशुआन सूत्र' (Dongxuan Sutra) अभी भी खतरे की घंटी बजा रहा था।

​अचानक, सोल ईटर का सूखा हुआ शरीर काली राख में बदल गया। लेकिन वह राख जमीन पर नहीं गिरी। वह हवा में उड़कर एक काले धुएं के बवंडर में बदल गई और सीधे विक्रम के चेहरे की ओर झपटी।

​"मूर्ख इंसान!" सोल ईटर की हंसी विक्रम के दिमाग के अंदर गूंजी। "तूने मेरा शरीर मारा है, मेरी आत्मा को नहीं! तेरा शरीर अब मेरा है! तेरे चार जीन अब मेरे होंगे!"

​वह काला धुआं विक्रम की नाक, कान और आँखों के जरिए उसके शरीर में जबरदस्ती घुसने लगा।

​"मास्टर!" नेफारा (स्पेल) चीखी और आगे बढ़ी, लेकिन एक अदृश्य दीवार ने उसे रोक दिया।

​विक्रम का शरीर हवा में जम गया। उसकी आँखें पूरी तरह काली हो गईं। सोल ईटर उसकी चेतना (Consciousness) को मिटाकर खुद मालिक बनने की कोशिश कर रहा था।

​आंतरिक दुनिया: मन का युद्ध (Inner World Battle)

​विक्रम के दिमाग के अंदर, सोल ईटर एक विशालकाय राक्षस के रूप में खड़ा था। वह विक्रम की छोटी सी सुनहरी आत्मा को कुचलने के लिए आगे बढ़ा।

​"तेरा शरीर बहुत शानदार है," सोल ईटर ने लालच से कहा। "इतनी शक्ति... मैं इस शरीर के साथ देवताओं को चुनौती दे सकता हूँ! अब मर जा, कीड़े!"

​सोल ईटर ने विक्रम की आत्मा को निगलने के लिए अपना विशाल मुंह खोला।

​लेकिन विक्रम... वह डरा नहीं था। वह मुस्कुरा रहा था।

​"तुमने होमवर्क नहीं किया, सोल ईटर," विक्रम की आत्मा ने शांति से कहा। "तुम्हें पता है मेरा पहला जीन कौन सा था?"

​अचानक, विक्रम की आत्मा के पीछे का सुनहरा आसमान फट गया। वहां रोशनी नहीं, बल्कि एक अनंत, गहरा काला ब्लैक होल था।

​यह 'मूल-स्रोत जीन: शून्य' (Void Gene) था।

​"शून्य (Void) न तो जन्म लेता है, न मरता है," विक्रम ने कहा। "वह बस... भूखा रहता है।"

​ब्लैक होल ने घूमना शुरू किया। उसका गुरुत्वाकर्षण (Gravity) सोल ईटर की कल्पना से परे था।

​"यह... यह क्या है? नहीं! नहीं!!!" सोल ईटर चिल्लाया। वह पीछे भागने की कोशिश करने लगा, लेकिन ब्लैक होल ने उसे एक तिनके की तरह खींच लिया।

​"तुम मेरा शरीर चाहते थे?" विक्रम की आवाज़ गूंजी। "अब तुम मेरा खाना बनोगे।"

​शूम्!

​सोल ईटर की चीखें ब्लैक होल में समा गईं और हमेशा के लिए शांत हो गईं।

​बाहरी दुनिया: पांचवां जीन

​विक्रम की आँखें झटके से खुलीं। उनमें अब कालापन नहीं, बल्कि एक अजीब सी पारदर्शी (Transparent) चमक थी।

​[सिस्टम अलर्ट: अत्यधिक ऊर्जा का अवशोषण!]

[आत्मा हमलावर 'सोल ईटर' को निगल लिया गया।]

[आत्मा शक्ति (Soul Power) में 500% की वृद्धि!]

​सोल ईटर के मरने के साथ ही, हवा में एक वस्तु तैरने लगी। यह सोल ईटर के अंदर छिपा हुआ 'पिता का हृदय' था—एक धड़कता हुआ, बैंगनी रंग का क्रिस्टल।

​पांचवां जीन।

​नेफारा (स्पेल) उड़कर विक्रम के पास आई। उसने उस दिल को देखा। उसकी यांत्रिक आँखों में दर्द और यादें थीं।

​"यह मेरे पिता हैं," नेफारा ने धीरे से कहा।

​विक्रम ने क्रिस्टल को नेफारा की ओर बढ़ाया। "यह तुम्हारा है, नेफारा। तुम इसकी असली वारिस हो। इसे लो और पाताल की रानी बन जाओ।"

​नेफारा ने हाथ बढ़ाया, लेकिन फिर रुक गई। उसने अपनी यांत्रिक भुजाओं को देखा, फिर विक्रम को।

​"नहीं, मास्टर," नेफारा ने सिर हिलाया। "मैं अब 'अधूरी' हूँ। मेरा आधा शरीर मशीन है। यह जीन... यह शुद्ध आत्मा है। अगर मैंने इसे लिया, तो मेरा शरीर फट जाएगा। केवल आप... जिसके पास बाकी चार तत्व हैं, इसे संभाल सकते हैं।"

​उसने विक्रम के हाथ को अपनी ओर खींचा और क्रिस्टल को विक्रम की छाती पर रख दिया।

​"इसे लीजिए। और मेरे लिए... उस आसमान को तोड़ दीजिए जिसने हमें कैद किया है।"

​विक्रम ने रानियों की ओर देखा। मीरा, सेराफिना, एलारा... सबने सहमति में सिर हिलाया।

​विक्रम ने पांचवें जीन को अपनी छाती में दबा लिया।

​महा-विकास (The Grand Evolution)

​जैसे ही पांचवां जीन शरीर में गया, विक्रम को लगा जैसे ब्रह्मांड उसके अंदर फट गया हो।

​[1. शून्य (Void)]

[2. समय (Time)]

[3. आकाश (Sky)]

[4. पृथ्वी (Earth)]

[5. आत्मा (Soul)]

​पाँचों तत्व एक चक्र में घूमने लगे। विक्रम का कवच टूटकर गिर गया। उसकी त्वचा फटने लगी और फिर दोबारा बनने लगी। हड्डियां डायमंड से भी ज्यादा सख्त हो गईं। खून का रंग बदलकर सुनहरा-बैंगनी हो गया।

​[सिस्टम क्रिटिकल अपडेट!]

[शर्त पूरी हुई: 5/5 मूल-स्रोत जीन एकत्रित।]

[विकास शुरू: मानव -> ???]

​पूरे पाताल लोक में भूकंप आ गया। विक्रम का शरीर हवा में तैरने लगा। उसके पीछे एक प्रभामंडल (Halo) बन गया जिसमें पाँच रंग घूम रहे थे।

​[नया पद प्राप्त: ओरिजिन गॉड (Origin God) - चरण 1]

[विशेषता: 'सृष्टि और विनाश' (Creation and Destruction)]

​अब विक्रम के पास कोई समय सीमा नहीं थी। उसका 'सुपर गॉड मोड' अब उसका स्थायी रूप बन गया था।

​"मैं महसूस कर सकता हूँ," विक्रम ने अपनी मुट्ठी भींची। उसने हवा में मुक्का मारा, और वहां का स्पेस कांच की तरह टूट गया। "मैं सब कुछ महसूस कर सकता हूँ।"

​मीरा, सेराफिना और एलारा—तीनों रानियां अपने घुटनों पर बैठ गईं। वे विक्रम की नई आभा (Aura) के सामने खड़े होने की हिम्मत भी नहीं कर पा रही थीं। यह दबाव एक राजा का नहीं, एक देवता का था।

​टूटा हुआ आसमान (The Broken Sky)

​अभी विक्रम अपनी शक्ति को समझ ही रहा था कि अचानक पाताल लोक का बैंगनी आसमान एक भयानक आवाज़ के साथ फट गया।

​कड़-कड़-कड़-कड़!

​आसमान में एक विशालकाय दरार पड़ गई। उस दरार के पीछे से एक blinding (चकाचौंध) सफेद रोशनी आई।

​उस रोशनी में से एक आँख दिखाई दी।

​यह आँख पूरे 'आयरन-क्लिफ सिटी' जितनी बड़ी थी। वह ठंडी, भावनाहीन और यांत्रिक थी।

​एक आवाज़ गूंजी—न हवा से, न पानी से, बल्कि सीधे अस्तित्व के ताने-बाने (Fabric of Existence) से।

​"चेतावनी। विसंगति (Anomaly) का पता चला।"

"प्रयोग संख्या 748-बी (मानव) ने निषिद्ध सीमा पार कर ली है।"

"प्रोटोकॉल: मिटाओ (Erase)।"

​उस विशालकाय आँख से एक सफेद रोशनी का स्तंभ (Pillar of Light) सीधे विक्रम के ऊपर गिरा। यह हमला लेडी स्कारलेट या गॉड-किलर के हमले से करोड़ गुना ज्यादा ताकतवर था। यह अस्तित्व को मिटाने वाली रोशनी थी।

​"विक्रम!" रानियां चिल्लाईं।

​लेकिन विक्रम... वह मुस्कुराया।

​उसने अपने नए 'पांच रंग के पंख' फैलाए।

​"तो तुम लोग हो वो... जो पर्दे के पीछे से खेल रहे थे," विक्रम ने ऊपर देखा। "इतने दिनों से मैं सोच रहा था कि ये 'जीन' और 'सिस्टम' किसने बनाया। आखिरकार मालिक सामने आ ही गए।"

​विक्रम ने अपना त्रिशूल (जो अब पांच रंगों से चमक रहा था) उठाया और उस सफेद रोशनी की ओर उड़ चला।

​"मिटाओगे मुझे?" विक्रम दहाड़ा। "आओ कोशिश करो!"

​उसने अपने त्रिशूल से उस दैवीय रोशनी पर वार किया।

​का-बूम!!!!

​टक्कर इतनी भयानक थी कि पाताल लोक और मानव लोक के बीच की दीवारें हिल गईं। स्क्रीन सफेद हो गई।

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